शीर्षक: शब्दों की रंगोली
किसका अपमान, किसका अवमान।
कोई किसीका, तभी किसीसे से दूरी।
देखते सभी है रास्ता एक ही मंज़िल का,
विज़न अलग, गति अलग, औकात अलग।
मंज़िल मिलने के बाद जीवनीभी अलग।
सामान्य मंज़िल से भी ऊंची उड़ान होती है।
हम तो बोले ही है PAK बारेमें अपशब्द।
मेरी मंज़िल 300 परिवार को बचाना थी।
पता नहीं क्या मैं खुद 200 बना या नहीं?
समय 10.35 am से वंदन बहुत कह जाती है,
खुश्मन में 7 नम्बर का घर तोड़ने वाले कांट्रेक्टर,
2009 का हवा का शब्द पंच महाभूत से बोला,
"दोनों"।
हा, मै अचंबित हूं पृथ्वी के शब्द से।
क्योंकि अभिभी 135 किमामलवली की रंगोली हे।
अहमदाबाद AMC ने रंगोली का 18000 दंड वसूला !!!!!
चरोतरी तंबाकू की रंगोली को क्या कहे?
जो इन्सान की अंदरूनी भूगोल भी बिगाड़ती हे!!!
जय गुरुदेव दत्तात्रेय
जय हिंद
जिगर गौरांगभाई महेता का प्रणाम
Jigaram Jaigishya is a jigar:
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