खो खो मत खेल।
चलक चलानी बहेतर था।
जो कुछ भी "था",
लेकिन 'था",
हे मन से मनन(विचार)
कहो मनन, क्या खेले अब?
"है" की परिभाषा अजब गजब!
अग जब जब अंग,
पसीना बहाके भी खेले,
प्रताडित ऊर्जा प्रतिपादनोंसे,
शरीर अवनि पर खेलने लगी।
पसीना भी काम लगा,
पसीने की गंध भी काम लगी,
गंधर्व शब्द तभी तो दूर गया।
शर्त है कि गौरवान्वित वान गौरसे
अविरत अनंत तक उर्जावान हुआ
मनोत्कर्ष के रव (आवाज़) से।
अमित रश्मि की प्रतिध्वनि,
सुनाई दी तो सूर्य को पहचाना।
जैसा सोचा वैसा नही था।
लेकिन क्वांतम भौतिक विज्ञान
उससे दूर नही लगा।
वह भी क़झार (त्रसरेणु)की बारिश से नही बचता।
जो भी आए उसे welcome,
जो भी जाए तो भिडकम।
ક્યાં સુધી આમ નથી મળતા?
ઓ કરૂણાસાગર,
ગઝલરૂપી શબ્દ તપાસો.
પાપણ કહે છે કે,
બધા ગુના માફ,
મઘમાતી મૌસમ માં,
પરિપક્વતાએ.
સંબંધોમાં સારા શ્રોતા બની
એક બીજાને ગમતા રહીએ.
Jay Gurudev Dattatreya
Jay HIND
जैगीष्य जिगरम जिगर:
જીગર ગૌરાંગભાઈ મહેતાના પ્રણામ
No comments:
Post a Comment