विश्वके महानतम लोगों को पूछा गया सवाल: "मृत्युके बाद क्या होता हे?"
मेरे खयालसे सवाल होना चाहीए: “क्या जीवन जीते समय ही मृत्यु का एहसास होता हे?”
जवाब हे : हा।
हाथ पैरके खाली मात्रा, क्षुब्ध मस्तिषी निर्विचार मन अवस्था, कुछ अचेतन अवचेतन के साथ शारीरिक खामी आदी जीवन के साथ मृत्यु हे।
बाकी मृत्यु के बाद कुछ नही होता।
सब लोग जीवन से मृत्यु दरम्यान 84 की परिभाषा में रहते हे।
जो सनातन धर्म मुख्य रुपसे समझे हे, वे तो धर्म की बात ही नही करते, क्योंकि सत्य सातत्य में होता है।
जहां सत्य हे वहां धर्म की कोई बात ही नही होती।
सत्य क्या हे?
मृत्यु ही परम सत्य हे।
मानुष को खेलने वाले अ कार रूपसे घोर कृत्य करते हे।
उनकी पहचान अघोरी नामक शब्द से हे।
रुका हुआ फैसला फिल्म अच्छी थी।
वैसे ही रुका हुआ समय सभी 4लोगों के साथ होता ही है।
जय हिंद
जय गुरुदेव दत्तात्रेय
Jigaram Jaigishya is a jigar:
જીગર ગૌરાંગભાઈ મહેતાના પ્રણામ
प्रथम गृह.......... ग
द्वितीय महेसुल ...म
तृतिय पंचायत.... प
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