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Friday, September 2, 2022
घनपाठ क्या हे
#वैदिक_मन्त्रों का सस्वर #पदपाठ करने से #सरस्वती के स्नान का फल प्राप्त होता है।यहाँ #यजुर्वेद का #घनपाठ हो रहा है. यदि वाक्य में शब्दों का मूल क्रम यह हो, १ / २ / ३ / ४ / ५ तो घन पाठ इस तरह होगा :- १ २ / २ १ / १ २ ३ / ३ २ १ / १ २ ३ / २ ३ / ३ २ / २ ३ ४ / ४ ३ २ / २ ३ ४ / ३ ४ / ४ ३ / ३ ४ ५ / ५ ४ ३ / ३ ४ ५ / ४ ५ / ५ ४ / ४ ५ / ५ इति ५ | इसे निम्न उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है :- संहिता पाठ = एषां पुरुषाणां -एषां पशूनां म भेर -म रो -मो एषां किन्चान अममत // अर्थ: हे परमेश्वर ! आप हमारे इन पुरुषों और पशुओं को भयरहित कीजिये | ये कभी भी पीडित ना हों, ना ही इनमें स्वास्थ्य का अभाव हो | पदपाठ = एषां /पुरुषाणां /एषां /पशूनां /म /भेः /म /अराः /मो -इति -मो /एषां / किं /चन /अममत /अममद -इत्य -अममत / नोट :- यहाँ नौवां और अंतिम विराम बारीकी को धयान में रखते हुए विशेषज्ञों के लिए दिया गया है, जिसे चाहें तो आप अनदेखा कर सकते हैं | सिवाय आधे विराम के , जिसे ‘ / ‘ से दर्शाया गया है, घन-पठन(स्वर-रहित; स्वरों के साथ सुनना अत्यंत हर्ष प्रदान करेगा.) निरंतर पठन है| यहाँ ‘ समास चिन्ह (-) ‘ व्याकरण के जानकारों के लिए दिए हैं | पठन पर इसका प्रभाव नहीं होता है | घन पाठ = एषां -पुरुषाणां -पुरुषाणां -एषां -एषां पुरुषाणां -एषां -एषां पुरुषाणां -एषां -एषां पुरुषाणां -एषां /पुरुषाणां -एषां -एषां पुरुषाणां पुरुषाणां -एषां पशूनां पशूनां -एषां पुरुषाणां पुरुषाणां -एषां पशूनां /एषां पशूनां पशूनां -एषां -एषां पशूनां -म म पशूनां -एषां -एषां पशूनां -म /पशूनां -म म पशूनां पशूनां -म भेर -भेर -म पशूनां पशूनां -म भेः /म भेर -भेर -मम भेर -मम भेर -मम भेर -म /भेर -मम भेर -भेर -मरो आरो म भेर -भेर्म अराः /म रो आरो मम रो मोमो आरो म म रो मो /आरो मो मो आरो आरो मो एषां -एषां मो आरो आरो मो एषां /मो एषां -एषां मो मो एषां किं किं -एषां -मो मो एषां किं / मो इति मो /एषां किंकिं -एषामेषं किं -चान चान किं -एषां -एषां किं -चान /किं चान चान किं किं चानममद -अममत चान किं किं चानममत /चानममद -आममक् -चान चानममत /अममद -इत्यममत / यहाँ उल्लेखनीय है कि संस्कृत में शब्दों का क्रम महत्व नहीं रखता |यदि अंग्रेजी वाक्य को अलग-अलग क्रम से रखा जाय, जैसे – Rama vanquished ravana तो इसका पाठ इस तरह होगा – Rama vanquished vanquished Rama Rama vanquished Ravana Ravana vanquished Rama Rama vanquished Ravana,.. और इसी तरह से … यहाँ इसकी अनर्थकता दिखायी देती है | संस्कृत में ऐसी असंगति उत्पन्न नहीं होती | एक घनपाठ में प्रथम और अंतिम पदों को छोड़कर बाकि के प्रत्येक पद का कम से कम तेरह बार पुनरावर्तन होता है | (आप ऊपरलिखित ‘पशूनां ‘ शब्द से इसकी जाँच कर सकते हैं.) इसी तरह, वेदों का घन पाठ वेद के प्रत्येक मंत्र का तेरह बार पाठ होने के बराबर है. और तेरह बार पाठ की पुनरावृत्ति से जो लाभ मिलता है, उसके बराबर है।
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