Thursday, June 23, 2022

BRTS and Metro Ahmedabad

आज का विषय थोड़ा सा अलग है। कृपया निम्न दिए गए फोटो को अच्छे से देखें खास तौर पर जो सड़कें बनी है उसे देखें।

जब जन्मार्ग बीआरटीएस का प्रावधान हुआ और आरसीसी के केबिन बनाएं कांच के साथ एक्रेलिक के साथ डिजिटल दरवाजे के साथ कंप्यूटर के साथ सेंसर के साथ तो उस वक्त जो सड़क बनी थी वह सिर्फ काली कपची और डामर के साथ बनी थी।

बाद में पता चला कि जब बस आती है बीआरटीएस की, तो वाइब्रेशन होता है और वाइब्रेशन के कारण जो आरसीसी स्ट्रक्चर था वह डैमेज होने की गुंजाइश थी। यह ज्यादा लंबे समय तक टिक नहीं पा सकता था क्योंकि वाइब्रेशन बस के रुकने से आने जाने से बहुत ज्यादा होती थी। जन्मार्ग लिखा हुआ फोटो।

इस वजह से कुछ सालों के बाद वापस वही सभी सडके, जो आरसीसी कंस्ट्रक्शन बीआरटीएस बस स्टॉप के स्टेशन के आसपास की थी वह चौरस या लंब चौरस के दायरे में बदली गई और वह कपची और डामर को हटाकर वहां पर आरसीसी कंस्ट्रक्शन की सड़क बनाई गई। जो पीली बस बताई है वह फोटो।

मेरा आज का विषय इसी पर निर्भर है कि अगर अहमदाबाद में जो ब्रिज बने हुए हैं, वह अभी वाइब्रेशन पाते हैं जब भारी वहीकल गुजरता है, ब्रिज के ऊपर से। साबरमती नदी के पुल और बीआरटीएस बस स्टेशन इसके गवाह है। क्योंकि बारी-बारी मरम्मत होती रहती है।

अहमदाबाद में मेट्रो रेलवे प्रोजेक्ट बहुत ही बड़ा कामयाब नुस्खा शायद हो सकता है राजकीय पार्टी के लिए जिससे वह वोटिंग में अच्छी गणना पा सके। रेलवे वाला जो ब्रिज का फोटो है वह और उसके नीचे की सड़क।

लेकिन जो मेट्रो रेलवे का ब्रिज का प्रावधान है वह सीधा सड़क से जुड़ा हुआ है और ब्रिज जो बना है वह पूरा तकरीबन डेढ या दो माली ऊपर बना है और आरसीसी कंस्ट्रक्शन से पूरा बना हुआ है।

नीचे सड़क का आवन जावन चालू ही रहेगा वह कभी शायद अटके गा नहीं।  लेकिन उस आवन जावन से जो वाइब्रेशन मिलेगी, वह मेरे अंदाज से यह ब्रिज पाएगा ही पाएगा। और शत प्रतिशत सरकार को दूसरा खर्चा करने का या जो पुराना खर्चा है उसमें डेप्रिसिएशन का जो वैल्यू है वह बढ़ाने का एक और मौका मिल जाएगा। जिससे कई लोगों के घर के चूल्हे भी शायद जलेंगे खिचड़ी के लिऐ!!!!

तो क्या वहां पर आरसीसी सड़क की गुंजाइश नहीं हो सकती?

जैसे बीआरटीएस में किया है? 

अगर पता था बीआरटीएस बस के प्रोजेक्ट दरमियान कि ऐसा हुआ है या हो चुका है, तो फिर जब मेट्रो रेलवे का ब्रिज बनाया तो उस वक्त का प्रावधान नीचे की सड़क का जो कपची और डामर से बनी हुई है, वह वाइब्रेशन ना करें, ऐसा एक प्रिकॉशनरी एक्ट लेने की जरूरत क्या सरकार के आईएएस ऑफिसर को सूची में नहीं आया?

अहमदाबाद में चार-पांच साल पहले और उसके बाद भी सतत जो नदी के ऊपर साबरमती नदी के ऊपर ब्रिज बने हैं उनका इंस्पेक्शन होता है और इंस्पेक्शन के द्वारा यदि कोई दिक्कत पाई जाए तो उसका समारकाम होता है, वैसे ही जब पुल का वाइब्रेशन मोड ऑन ज्यादा होता है तो उसको थोड़े दिनों के लिए स्थगित करके उसकी मरम्मत करते हैं, और फिर वाइब्रेशन ना हो ऐसा प्रकाशक कह देते हैं कि हो गया है, लेकिन वाइब्रेशन तो होता ही है।

तो अब यह मेट्रो रेलवे स्टेशन एवं मेट्रो स्टेशन के जो स्टैंड बने हैं आरसीसी के, उस के बारे में जितना खर्चा हो चुका है, उसके बाद अब सरकार कुछ कह सकेगी? उनको गौरतलब रहेगा क्या की गुजरात भूकंप के दायरे में झोन 5 में हे???

जय गुरुदेव दत्तात्रेय 
जय हिंद 
जयतु भारतम् 
જીગર ગૌરાંગભાઈ મહેતા



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