बालक का साथ प्रकृति देती है पर चीटिंग अगर बड़े के साथ बैठे होगी तो दूसरा बालक जो नीति से खेलेगा या खेलता होगा वह हार ही जायेगा।
पर लम्बे समय के बाद तो जीतेगा ही। क्योंकि नित्य नियति इंसान की नीति पे ही तय होती हे।
"जर" प्रकृति में सब साथ में होते है पर अगर कोई अपनी बुद्धि प्रतिभा से आगे के दायरे में आते आते नए संपर्क से अच्छा चाहे तो फिरभि एक समय तक अपना उस पुराने समय तक का तकाजा संपूर्ण ना निकले तब तक वह दूसरी बुद्धि याज्ञवल्क्य के जैसे ही आनुषंगिक रहता हे।
फ्रोंजर पार्क के स्कल्पचर इस बात की गवाही के अनुमोदन में स्थान में स्थापित हे।
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