यह स्पष्ट है कि मुफ़्त शब्द देश सेवा के लिए कभी भी अच्छा नहीं है।
राष्ट्रीय विकास के वित्तीय पहलुओं पर ध्यान देना मायने रखता है! इस पर कोई आश्चर्य नहीं, लेकिन यह सोचना जरूरी है कि जब इतने सारे लोगों ने सोने पर लोन लिया तो भारत में कहीं कहीं फ्री स्कीम के साथ गोल्ड लोन पर भी क्यों?
जब हमारे पास कोई खरीद विभाग ही नहीं है, तो किस लागत को प्रभावी ढंग से चमकाया जाएगा?
भारतीय रिजर्व बैंक ने जब गोल्ड खरीदा तो भारतका भारतीय फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 648.5 मिलियन $ के रिकॉर्ड पर पहुंचा।
आरबीआई ने 2023 में 17.9 टन गोल्ड खरीदा था।
दिसंबर 2017 में आरबीआई का गोल्ड रिजर्व 617 टन था।
2021 में 677 टन के तकरीबन गोल्ड का रिजर्व था।
फरवरी 2024 में यह बढ़कर 901 टन हो गया।
भारत में हर साल 900 से 1000 टन गोल्ड इंपोर्ट होता है।
भारत में लोगों के पास तकरीबन 25000 टन से ज्यादा सोना है।
सन 2000 में सोना 4400 ₹ प्रति 10 ग्राम पर था,
सन 2010 में बढ़कर 20700 ₹ प्रति 10 ग्राम पर था
सन 2020 में कीमतें 50000 ₹ के पार चली गई
सन 2023 में सोने के दाम 63000 ₹ पर पहुंच गए
सन 2024 में सोना आजकी तारीखी मे 72000 ₹ के पार भी जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।
वैसे भी गोल्ड (वह) अभी ऑल टाइम हाई पर आ गया है।
मण्पुरम और मुथूट फाइनेंस आधारित विवरण रिकॉर्ड पर जमा होते हैं कि भारत में भारतीयों के घर के या भारतीय महिलाओं के पास अंदरूनी हिस्से में तक़रीबन 25000 टन से अधिक सोना है...
लीक से हटकर बात.. नेपथ्य पर ध्यान केंद्रित करते ही कई सही बात सामने आएगी की कुछ कम्पनी केसे लोन के जरिए कई लोगों को बेवकूफ व्याज के चक्कर में बना रही है।
जय हिंद
जय गुरुदेव दत्तात्रेय
जिगर गौरांगभाई महेता का प्रणाम
No comments:
Post a Comment