Monday, September 4, 2023

दूरदर्शन की प्रतर्दन भाग १

दूरदर्शन की प्रतर्दन भाग १

दूरदर्शन का पहला प्रसारण 15 सितंबर, 1959 को प्रयोगात्‍मक आधार पर आधे घण्‍टे के लिए शैक्षिक और विकास कार्यक्रमों के रूप में शुरू किया गया। उस समय दूरदर्शन का प्रसारण सप्ताह में सिर्फ तीन दिन आधा-आधा घंटे होता था। तब इसको 'टेलीविजन इंडिया' नाम दिया गया था बाद में 1975 में इसका हिन्दी नामकरण 'दूरदर्शन' नाम से किया गया।



शुरुआती दिनों में दिल्ली भर में 18 टेलीविजन सेट लगे थे और एक बड़ा ट्रांसमीटर लगा था। तब दिल्ली में लोग इसको कुतुहल और आश्चर्य के साथ देखते थे। इसके बाद दूरदर्शन ने धीरे धीरेअपने पैर पसारे और दिल्‍ली (1965); मुम्‍बई (1972); कोलकाता (1975), चेन्‍नई (1975) में इसके प्रसारण की शुरुआत हुई। शुरुआत में तो दूरदर्शन यानी टीवी दिल्ली और आसपास के कुछ क्षेत्रों में ही देखा जाता था। दूरदर्शन को देश भर के शहरों में पहुँचाने की शुरुआत 80 के दशक में हुई और इसकी वजह थी 1982 में दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले एशियाई खेल थे। एशियाई खेलों के दिल्ली में होने का एक लाभ यह भी मिला कि श्वेत और श्याम दिखने वाला दूरदर्शन रंगीन हो गया था। फिर दूरदर्शन पर शुरु हुआ पारिवारिक कार्यक्रम हम लोग जिसने लोकप्रियता के तमाम रेकॉर्ड तोड़ दिए। 1984 में देश के गाँव-गाँव में दूरदर्शन पहुँचानेके लिए देश में लगभग हर दिन एक ट्रांसमीटर लगाया गया। इसके बाद आया भारत और पाकिस्तान के विभाजन की कहानी पर बना बुनियाद जिसने विभाजन की त्रासदी को उस दौर की पीढ़ी से परिचित कराया। इस धारावाहिक के सभी किरदार आलोक नाथ (मास्टर जी), अनीता कंवर (लाजो जी), विनोद नागपाल, दिव्या सेठ घर घर में लोकप्रिय हो चुके थे। फिर तो एक के बाद एक बेहतरीन और शानदार धारवाहिकों ने दूरदर्शन को घर घर में पहचान दे दी। दूरदर्शन पर 1980 के दशक में प्रसारित होने वाले मालगुडी डेज़, ये जो है जिन्दगी, रजनी, ही मैन, वाहः जनाब, तमस, बुधवार और शुक्रवार को 8 बजे दिखाया जाने वाला फिल्मी गानों पर आधारित चित्रहार, भारत एक खोज, व्योमकेश बक्शी, विक्रम बैताल, टर्निंग प्वाइंट, अलिफ लैला, शाहरुख़ खान की फौजी, रामायण, महाभारत, देख भाई देख ने देश भर में अपना एक खास दर्शक वर्ग ही नहीं तैयार कर लिया था बल्कि गैर हिन्दी भाषी राज्यों में भी इन धारवाहिकों को ज़बर्दस्त लोकप्रियता मिली।

दूरदर्शन की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव
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दिल्‍ली (9 अगस्‍त 1984), 
मुम्‍बई (1 मई 1985), 
चेन्‍नई (19 नवम्‍बर 1987), 
कोलकात्ता (1 जुलाई 1988)
26 जनवरी 1993: मेट्रो चैनल शुरू करने के लिए एक दूसरे चैनल की नेटवर्किंग
14 मार्च 1995: अंतर्राष्‍ट्रीय चैनल डीडी इंडिया की शुरूआत हुई।
23 नवम्‍बर 1997 : प्रसार भारती का गठन (भारतीय प्रसारण निगम)
18 मार्च 1999: खेल चैनल डीडी स्‍पोर्ट्स की शुरूआत
26 जनवरी 2002: संवर्धन/सांस्‍कृतिक चैनल की शुरूआत
3 नवम्‍बर 2002 : 24 घण्‍टे के समाचार चैनल डीडी न्‍यूज की शुरूआत
16 दिसम्‍बर 2004 : निशुल्‍क डीटीएच सेवा डीडी डाइरेक्‍ट की शुरूआत

Few others details

दूरदर्शन या टेलिविज़न एक ऐसी दूरसंचार प्रणाली है जिसके द्वारा चलचित्र व ध्वनि को दो स्थानों के बीच प्रसारित व प्राप्त किया जा सके। यह शब्द दूरदर्शन सेट, दूरदर्शन कार्यक्रम तथा प्रसारण के लिये भी प्रयुक्त होता है। 

दूरदर्शन का अंग्रेजी शब्द 'टेलिविज़न' लैटिन तथा यूनानी शब्दों से बनाया गया है जिसका अर्थ होता है दूर दृष्टि (यूनानी - टेली = दूर, लैटिन - विज़न = दृष्टि)। दूरदर्शन सेट १९३० के उत्तरार्ध से उपलब्ध रहे हैं और समाचार व मनोरंजन के स्रोत के रूप में शीघ्र ही घरों व संस्थाओं में आम हो गये। १९७० के दशक से VCR /VCP टेप और इसके वाद वीसीडी व डीवीडी जैसे अंकीय प्रणालियों के द्वारा रिकार्ड किये कार्यक्रम व सिनेमा देखना भी सम्भव हो गया।

भारत में दूरदर्शन प्रसारण का प्रारम्भ १५ सितम्बर, १९५९ में हुआ जब एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में दिल्ली में दूरदर्शन केन्द्र खोला गया तथा दूरदर्शन नाम से सरकारी दूरदर्शन चैनल की नींव पड़ी।

दूरदर्शन में उपग्रह तकनीक का प्रयोग १९७५-१९७६ में प्रारम्भ हुआ।

यहां पर हमें दूरदर्शन के जो एंबलम है उसकी बात करनी है और उसके रिगार्डिंग जो मिस्टर भट्टाचार्य थे उन्होंने बहुत सोच के एक सिंबल दिया था जो बाद में 80 के दशक में दूरदर्शन का सिंबल या लोगों या एंबलम हो गया।

दूरदर्शन के ‘Logo’ को एनआईडी के पूर्व छात्र देवाशीष भट्टाचार्य ने अपने 8 दोस्तों के साथ तैयार किया था. जब दूरदर्शन ने ऑल इंडिया रेडियो से अलग होने का फ़ैसला किया, उस वक़्त उनको अपना एक अलग ‘Logo’ भी चाहिए था. इसके लिए उन्होंने एनआईडी के छात्रों की एक टीम को ये ज़िम्मेदारी सौंपी.
भाग १ समाप्त 

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