गंधर्व, एक भेदी शब्द।
रावण और वसुदेव का गंधर्व भेदाभेद। सांप अपनी चमड़ी उतरदेता है, वैसी बात।
सात त्वचा के पद को भेद ने के बाद आएगा नया आठवां वो त्वक वाला कृष्ण, जो वसुदेव का घोषित पुत्रक, जिसे अष्ट प्रकृति वाला कहा गया हे।
अगर वसुदेव, पुत्रक से त्वक के साथ जुड़ा तो रावण और दसों दिशा का माहिर, लेकिन कुछ समय तक ही।
बलराम की सेरोगेसी थी, और राम, बलराम से पहले परशुराम थे। जो कर्ण, द्रोण, भीष्म के गुरु थे, लेकिन याज्ञवल्क्य तो जनक से लेकर परीक्षित के पुत्र जन्मेजय का भी पूजनीय रहा हे।
रावण भी भली भांति जानता होता है की उसकी असली मृत्यु याद शक्ति कम होगी तो ही होगी।
शून्य का आधा एक के अंदर और दूसरे आधे की शुरुआत उसी बात पे निर्भर की होगी तभी व्याकरण में संस्कृत में आधी गुम (• या •) की बात वेदिक तोर पे रही होगी।
जय गुरुदेव दत्तात्रेय
जय हिंद
जिगरम जैगिष्य ही जिगर हे।
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