मित्रस्य वयम
व्योमिय वायुस्य वारूणी विद्यायै आदित्याग्निये च पृथ्विये मामका प्रणाम।
का + व्व्व+ उर + ऊ = काव्व्वुरु
झषाणाम च श्वान चित्रम सुंदरम।
जय गुरुदेव दत्तात्रेय
जय हिंद
जिगरम जैगीष्य जिगर:
पितास्य अग्र चरणीय स्थानीय गमनम च मातास्य क्षणिक घटिका पश्चात द्वितीय चरणम स्थानीय गमनम नित्यम संभवत मणिनगरीय लाल बस स्टेशन च रमण नगरम क्षेत्रीय अंतरे।
मामका विहंगावलोकन पुष्टि ४५ वय पश्चात, दिव्य ज्ञानम : अन्य न्यून नास्ति शून्यम।
माँ नित्य आला। पश्चात पिता एकम। मम द्वितीयम।
विनोद भट्ट लेख शिर्षक स्मरण क्रियामी। इदम तृत्यम।
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