Tuesday, March 24, 2026

भंते

भंते ( पाली ) थेरवाद परंपरा में बौद्ध भिक्षुओं और वरिष्ठों को संबोधित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक सम्मानजनक शीर्षक है।

धार्मिक शब्द का अर्थ है "आदरणीय महोदय।" 


भंते एक लिंग-तटस्थ शब्द है, और भिक्षुओं और भिक्षुणियों दोनों को संबोधित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है । यह भदंत शब्द का सम्बोधन रूप है , जो महानता और सम्मान की पहचान प्रदान करता है। अंग्रेजी में, शब्द का अक्सर आदरणीय के रूप में अनुवाद किया जाता है ।  


नेपाली शब्द नंगे और बंदे की व्युत्पत्ति एक ही है और बौद्ध पादरियों को संबोधित करने के लिए उपयोग की जाती है । 


भंते का उपयोग विशिष्ट बौद्ध भिक्षुओं के सम्मान या पते के रूप में भी किया जा सकता है, जैसे कि थाईलैंड में अजान , फ्रा या लुआंग पोर या अशिनबर्मा (अब म्यांमार ) में, तिब्बत में रिनपोछे ।


भंते से संबोधित कुछ प्रसिद्ध भिक्षुओं में शामिल हैं:


भंते के. श्री धम्मानंद

भंते धर्मवारा

भंते हेनेपोला गुणारत्न ("भंते जी")

भंते धम्मलोक महास्थविर

भंते कुमार कश्यप महास्थवीर

भंते प्रज्ञानन्द महास्थवीर

भंते सितागु सयादव

भंते विमलरामसी


व्याकरणिक रूप से "भंते" एक पाली शब्द "भदंता" (आदरणीय, श्रद्धेय) का एक सम्बोधन रूप है। सम्बोधन का मामला निरूपित करता है और पते के लिए उपयोग किया जाता है।


श्रीयूत भगदत्त पौराणिक नाम हे। 

दांते रशिया में श्रीमान के तौर पे उच्चारण करते है।

व्याकरणिक रूप से "भंते" एक पाली शब्द "भदंता" (आदरणीय, श्रद्धेय) का एक सम्बोधन रूप है। 


व्याकरण की भाषा अपभ्रंश साबिति।




Monday, March 23, 2026

अन्न नबी सल्लू अलैह, सलवातुल्लाह अलैह

या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह 
या हबीबल्लाह या हबीबल्लाह

अन्न नबी सल्लू अलैह, 
सलवातुल्लाह अलैह 
व यनालुल-बरकत, 
कुल्लु मन सल्ला अलैह

काबे के बद्वद दुजा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद 
तैबा के शम्स-उद-दुहा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद 
शाफ़िए रोज़े जज़ा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद 
दाफ़िए जुम्ला बला, 
तुम पे करोड़ों दुरूद

दिल करो ठंडा मेरा 
वो क़दमे पा चाँद सा 
सीने पे रख दो ज़रा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद 
ज़ात हुई इंतिख़ाब, 
वस्फ़ हुए लाजवाब 
नाम हुआ मुस्तफा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद

बे हुनर बे तमीज़, 
किसके हुए हैं अज़ीज 
एक तुम्हारे सिवा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद 
आस है कोई न पास, 
एक तुम्हारी है आस 
बस यही आसरा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद

सीना के हैं दाग़ दाग़, 
कह दो करें बाग़ बाग़ 
तैबा से आके सबा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद

तुम से जहाँ का निज़ाम, 
तुम पे करोड़ों दुरूद 
तुम पे करोड़ों सना, 
तुम पे करोड़ों दुरूद 
तुम हो जव्वाद व करीम, 
तुम हो रऊफ़ व रहीम 
भीख हो दाता अता, 
तुम पे करोड़ों दुरूद 
ख़ल्क़ के हाकिम हो तुम, 
रिज़्क़ के क़ासिम हो तुम 
तुम से मिला जो मिला, 
तुम पे करोड़ों दुरूद

नाफ़ेई वो दाफ़ेई हो तुम, 
शाफ़ीई वो राफेई हो तुम 
दर्द को कर दो दवा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद

बरसे करम की बहार, 
भूले नेअमत के चमन 
ऐसी चला दो हवा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद 
क्यों कहूँ बे-कस हूँ मैं, 
क्यों कहूँ बे-बस हूँ मैं 
तुम हो मैं तुम पे फ़िदा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद

कर के तुम्हारे गुनाह, 
माँगे तुम्हारी पनाह 
तुम कहो दामन में आ, 
तुम पे करोड़ों दुरूद 
हम ने ख़ता में न की, 
तुम ने अता में न की 
कोई कमी सरवरा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद

आँख अता कीजिए, 
उस में ज़िया दीजिए 
जलवा क़रीब आ गया, 
तुम पे करोड़ों दुरूद 
काम वो ले लीजिए, 
तुम को जो राज़ी करे 
ठीक हो नामे रज़ा, 
तुम पे करोड़ों दुरूद

النبی صلوا علیہ، صلوٰۃ اللہ علیہ

يا رسول اللہ یا رسول اللہ یا حبیب اللہ یا حبیب اللہ

النبی صلوا علیہ، صلوٰۃ اللہ علیہ و ينال البركة كل من صلی علیہ

کعبے کے بدر الدجیٰ تم پہ کروڑوں درود طیبہ کے شمس الضحیٰ تم پہ کروڑوں درود شافع روز جزا تم پہ کروڑوں درود دافع جملہ بلا تم پہ کروڑوں درود

دل کرو ٹھنڈا میرا وہ قدم پا چاند سا سینے پہ رکھ دو ذرا تم پہ کروڑوں درود ذات ہوئی انتخاب وصف ہوئے لاجواب نام ہوا مصطفیٰ تم پہ کروڑوں درود

بے ہنر ہے تمیز کس کے ہوئے ہیں عزیز اک تمہارے سوا تم پہ کروڑوں درود آس ہے کوئی نہ پاس، اک تمہاری ہے آس بس یہی آسرا تم پہ کروڑوں درود

سینہ کے ہیں داغ داغ کہہ دو کریں باغ باغ طیبہ سے آکے صبا، تم پہ کروڑوں درود

درود تم پہ کروڑوں ثنا تم پہ کروڑوں درود تم ہو جواد و کریم، تم ہو رؤف و رحیم بھیک ہو داتا عطا تم پہ کروڑوں درود خلق کے حاکم ہو تم، رزق کے قاسم ہو تم تم سے ملا جو ملا تم پہ کروڑوں درود

نافع و دافع ہو تم، شافع و رافع ہو تم درد کو کر دو ،دوا تم پہ کروڑوں درود

برسے کرم کی بہار بھولے نعمت کے چمن ایسی چلا دو ہوا تم پہ کروڑوں درود کیوں کہوں بے کس ہوں میں کیوں کہوں بے بس ہوں میں تم ہو، میں تم پہ فدا تم پہ کروڑوں درود

کر کے تمہارے گناہ مانگی تمہاری پناه تم کہو دامن میں آ، تم پہ کروڑوں درود ہم نے خطا میں نہ کی تم نے عطا میں نہ کی کوئی کمی سرورا تم پہ کروڑوں درود

آنکھ عطا کیجیے، اس میں ضیاء دیجیے جلوه قریب آ گیا تم پہ کروڑوں درود کام وہ لے لیجیے، تم کو جو راضی کرے ٹھیک ہو نام رضا تم پہ کروڑوں درود





Inzamam Ul Haq 
Aalu bhaan 
8.5 IMDB rating., good story'.. unique Film 

Happy Moments 
Jay Gurudev Dattatreya Jay Hind Aameen


Sunday, March 22, 2026

એકસ બેબસ (one good two good)

क्षेत्रित दृ सम्यक औ पद पतन्ते सन तास रूपीन् स्मयन्तक तेजो बलं धृतिः अभय रूपे श्व तत्विय स्वाहा प्राप्ya:। 
द कार स्वयम् नास्ति खिलन्ति स्व ऊर्जम् ल कारित् पलण वृत्ति:। कृष्यजुर्वेदम् नास्ति स्थापितम् चिरंजीवी, अपितु द्रो च कृ स्थापितम् चिरंजीवी अश्वत्थामा बलिर्व्यासो अक्रुर रुपं अस्ति। KrushnaYajurvediyam details are unique...
ते द्रोण कलशम् छल्के अति सत्व गुण सम्मपने।
मुदस्सर नज़र के मुवक्किल के अज़ीज़ की मुस्कान गलती से भी आंसू ना बने।
लम्हा, ए बरकत तख्तों ताजके रहनुमा इंसान का कोई तकरीर से गलत ना समझे।
क्या पता आज की शानोशौकतवाली बात रक्तचाप के ज़लज़ले में बह ना जाए।
खुद तो जिंदा हूं लेकिन दूसरोंकी आंखों का जायका अरीसेमें खुदसे अलग लगता हे।
अबू अब्दुल्लाह अल-सादिक़ (उन पर शांति हो) के हवाले से, उन्होंने कहा: अल्लाह के रसूल (अल्लाह उन पर और उनके परिवार पर रहमत फरमाए और उन्हें सलाम भेजे) ने फरमाया: “जो कोई तीन बेटियाँ या तीन बहनें पालता है, उसके लिए जन्नत महज़ है।” तब पूछा गया, “ऐ अल्लाह के रसूल, दो के बारे में क्या?” उन्होंने कहा, “और दो।” तब पूछा गया, “ऐ अल्लाह के रसूल, एक के बारे में क्या?” उन्होंने कहा, “और एक।”
ओउ्म् च ओम या ॐ? How to considering?
जय गुरुदेव दत्तात्रेय जय हिंद अस्मिन् आम् इं
उ् यद्यपि प्लुत हे म् कार के साथ, तो पूर्ण ओ कार से ॐ कार वास्तविक क्षेत्र में कैसे होगा? 
ओ कार रूप तत्व छोटे बच्चे के साथ आधी माँ के साथ कैसे गिनेंगे?
आधी माँ कैसी होगी?
म ं आ ?
वास्तविक क्षेत्रों की विभावना से तो अर्जुन भी एकबार डर गया था। हम क्या हे? 
प्रशांत! Thanks for advice... But good God is gracious...
Once My divangat father gave me Two words 
Ekas, bebas 
Jigar G Maheta 
E"/\|: (My name in Brahmilipi)
Jay Gurudev Dattatreya Jay Hind Aameen khushaamdeen Aameen

भंते

भंते ( पाली ) थेरवाद परंपरा में बौद्ध भिक्षुओं और वरिष्ठों को संबोधित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक सम्मानजनक शीर्षक है। धार्मिक शब...