"सत्यं परम धीमहि" की महत्ता
ओजो॑ऽसि स॒होऽसि॒
बल॑म॒सि॒ भ्राजो॑ऽसि॒
दे॒वाना न्धाम॒ नामा॑सि॒
विश्व॑म॒सि विश्वायु
स्सर्वमसि सर्वायु
रभिभूरोङ्
गायत्री मावा॑हयामि
सावित्री मावा॑हयामि
सरस्वती मावा॑हयामि॒
श्रीय मावा॑हयामि
छन्दर्षी नावा॑हयामि
गायत्रिया गायत्रीच्छन्दो
विश्वामित्र ऋषिस्सविता
देवताऽग्निर्मुखं
ब्रह्मा शिरो
विष्णु र्हृदय ँ
रुद्र श्शिखा
पृथिवी योनि :
प्राणापान व्यानोदान
समाना सप्राणा
श्वेतवर्णा साङ्ख्यायन सगोत्रा:
गायत्री चतुर्वि
शत्यक्षरा त्रिपदा
षट् कुक्षि पञ्चशीर्षोपनयने
वि॑नियोग
ओम् भू : । ओम् भुव : । ओ सुव : ।
ओम् मह : । ओञ्जन : । ओन्तप : ।
ओ(• सत्यम् ।
ॐ तथ्संवितु वरं 'ण्यं भर्गो देवस्य॑ धीमहि ।
धियो यो न॑ : प्रचोदया॑त् ।
(पाठ दरमयान मनमे बोले जाने वाला विशिष्ठ गायत्री मंत्र)
ओमापो ज्योती रसोऽमृतं ब्रह्म भू र्भुवस्सुव रोम् ।।
ओर अंतमे बोला जानेवाला मंत्र
सह ना॑व॒वतु ।
सह नौ भुनक्तु ।
सह वीर्य करवावहै ।
तेजस्वि नावधी॑ त॒मस्तु मा वि॑द्वषावहै' ॥
ॐ शान्ति श्शान्ति श्शान्ति॑ ।।
पूरा पाठ जो बीचमे आता 4है वह वीडियो मे उपलब्ध हे।
अवधि यानि समय, लेकीन वह समय जिसका उल्टा प्रवाह हे यानी एंटी क्लोक की तरह। कैसे? अव यानि रुद्ध या उल्टा और "धि" यानी जिसने कुछ धारण किया है ईच्छा से वह।
धीमहि शब्द गायत्री में प्रचलित हे।
.. देवस्य धीमहि धियो योन: प्रचोदयात।
देवस्य यानी देव की तरफ से या देव की..
धीमहि
धारण की हुई बड़ी ईच्छा वाला आंतर मन (महि),
धियो योन:
दूसरे के छोटी धारण की हुई ईच्छा का यजन करने वाले अच्छे वृंद... में हमारे यजन के वृंद के साथ जुड़ने से...
.. प्रच उदय अत... यानी जो समय प्रवाह के भूतकाल से जीवन मे मनुष्य के आगे से जुडा हुआ है उसका उदय होके अलग होने या करने वाली प्रक्रिया।
जो सत्य है वही परम ही धीमहि यानी बड़ी ईच्छा वाला मनुष्य का आंंतर मन हे।
वैसे "धीमहि" मेरे मित्र भक्ति एवं मनन पाठक की पुत्री का नाम है।
अवधि नाम मेरे सबसे बड़े साले की बीचवाली पुत्री का नाम है।
जय गुरुदेव दत्तात्रेय
जय हिंद
Jigaram Jaigishya is a jigar:
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