जब महेंदी चढ़े तो एक ही हाथों पे रंग चढ़े।
मन से मन मिलाओ शरीर अलग करके ।
दुआ तो किसी की भी काम लगती हे दूर से,
सिर्फ़ उसको पंख लगाना अपना काम हे।
समर्थेश्वर मन्दिर गया था पत्नी के साथ।
धातु की पट्टी देखी छत पर अंदर की तरफ।
शायद आरोहण विशिष्ठ ही रहेगा अब तो।
कपड़े के ध्वज के नीचे धातु शलाका गुंबज!!
सालंगपुर धाम हनुमानजी का पवित्र थल
शतामृत महोत्सव वह भी 25000 फलो का!!
तारीफ कैसे करे वह, वानर भी चिरंजीव हे।
फल के कूट उत्सव में केसे फल सेवन करेगा???
नये साल का नया दौर पुरानी सिख के साथ,
कई लोगों का मस्तिष्की ज्ञान बिंदु चमकाएगा।
आनेवाली ज्ञान पंचमी की सभीको शुभकामना,
क्योंकि लाभ पांचम को ही ज्ञान पंच मी कहते हे।
जय गुरुदेव दत्तात्रेय
जय हिंद
Jigaram Jaigishya is a jigar:
જીગર ગૌરાંગભાઈ મહેતાના પ્રણામ
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